पत्रकारिता जीवन

हालांकि बचपन से ही मेरी रूचि लिखने-पढ़ने में ज्यादा रही है। इस दौरान गाँव में घंटों अखबारों से चिपके रहना मेरी आदत सी हो गयी थी। चुकि, उम्र कम थी और और स्कूल की पढ़ाई भी जरुरी था, मैंने दसवीं कक्षा में आकर लेख लिखना शुरू किया। मेरी रूचि में और ज्यादा इज़ाफा तब होने लगा जब मेरे लिखे हुए कई लेख अखबारों में छपने शुरू हो गए। 

 

अचानक एक दिन मेरी मुलाक़ात वहां के जाने माने पत्रकारों से हुई। बातचीत के दौरान वे मुझसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने मुझे कहा कि आज तक समाचार चैनल में काम करोगे? मैं तैयार हो गया। 

एक दिन फिर बिहार से दिल्ली जाने का मौका मिला ,वहा मैं देखना चाहता था की न्यूज़ चैनल कहाँ चलता है उसी दौरान नोएडा में मेरी मुलाकात अजीत अंजुम सर से हुई उसके बाद बिहार चुनाव में कवरेज की।  मेरे अनुभव और काम को सराहा जाने लगा और एक दिन बड़ा पत्रकार बनने की उम्मीद लिए हुए दिल्ली आ गया यहाँ पर बड़े चैनल आज तक ,ए बी पी न्यूज़ के अलावा और कई चैनलों में काम किया। 

 

जब मैं पत्रकारिता की पढाई कर रहा था उस समय मेने अपना एक न्यूज़ पोर्टल शुरू किया था जो की काफी चर्चित हुआ। हाल -फिलहाल मैं कई बड़े राजनीतिज्ञों का सोशल मीडिया और मीडिया संभालता हूँ और कई अख़बार और विेदेशी वेबसाइट के लिए लेख लिखता हूँ।  

 

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